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mahabharat 15.17.17: हे पुत्रों! पूर्वकाल में मैंने अपने स्वामी महाराज पाण्डु के विशाल राज्य का उपभोग किया है, बहुत-बहुत दान दिया है और विधिपूर्वक यज्ञों में सोमरस का पान भी किया है॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 15.17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  15.17.17 
भुक्तं राज्यफलं पुत्रा भर्तुर्मे विपुलं पुरा।
महादानानि दत्तानि पीत: सोमो यथाविधि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे पुत्रों! पूर्वकाल में मैंने अपने स्वामी महाराज पाण्डु के विशाल राज्य का उपभोग किया है, बहुत-बहुत दान दिया है और विधिपूर्वक यज्ञों में सोमरस का पान भी किया है॥ 17॥
 
O sons, in the past I have enjoyed the vast kingdom of my master Maharaja Pandu, have given large donations and have also drunk Soma in yajnas as per the prescribed method.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)