श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  15.17.16 
न तस्य पुत्रा: पौत्रा वा क्षतवंशस्य पार्थिव।
लभन्ते सुकृताँल्लोकान् यस्माद् वंश: प्रणश्यति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजन! जिस पुरुष का वंश नष्ट हो जाता है, उसके पुत्र-पौत्र कभी स्वर्ग को प्राप्त नहीं होते, क्योंकि वह वंश नष्ट हो जाता है॥16॥
 
King! The sons and grandsons of a person whose dynasty is destroyed never attain the heavenly abode because that dynasty is destroyed.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)