Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.17.13-14: हे राजन! जब उस पापी दु:शासन ने अपनी बुद्धि खोकर मेरी इस पुत्रवधू के केश खींचे, तब मैं दुःख से भर गया था। इसीलिए उस समय मैंने विदुला के वचनों द्वारा तुम्हें अपना तेज बढ़ाने के लिए प्रेरित किया था। हे पुत्रों! इस बात को अच्छी तरह समझ लो॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 15.17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  15.17.13-14 
केशपक्षे परामृष्टा पापेन हतबुद्धिना।
यदा दु:शासनेनैषा तदा मुह्याम्यहं नृपा:॥ १३॥
युष्मत्तेजोविवृद्धॺर्थं मया ह्युद्धर्षणं कृतम्।
तदानीं विदुलावाक्यैरिति तद् वित्त पुत्रका:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जब उस पापी दु:शासन ने अपनी बुद्धि खोकर मेरी इस पुत्रवधू के केश खींचे, तब मैं दुःख से भर गया था। इसीलिए उस समय मैंने विदुला के वचनों द्वारा तुम्हें अपना तेज बढ़ाने के लिए प्रेरित किया था। हे पुत्रों! इस बात को अच्छी तरह समझ लो॥13-14॥
 
O kings! When that sinner Dushasan, who had lost his wisdom, pulled the hair of this daughter-in-law of mine, I was overcome with sorrow. That was the reason that at that time I encouraged you to increase your brilliance through the words of Vidula. O sons! Understand this thing well.॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)