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mahabharat 15.17.1: कुंती बोली, "हे महाबाहु पाण्डुपुत्र! तुम्हारा कहना ठीक है। हे राजाओं! पूर्वकाल में तुम अनेक प्रकार के कष्ट सहकर दुर्बल हो गये थे, इसलिए मैंने तुम्हें युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया था।   |   mahabharat अध्याय 15.17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.17.1 
कुन्त्युवाच
एवमेतन्महाबाहो यथा वदसि पाण्डव।
कृतमुद्धर्षणं पूर्वं मया व: सीदतां नृपा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
कुंती बोली, "हे महाबाहु पाण्डुपुत्र! तुम्हारा कहना ठीक है। हे राजाओं! पूर्वकाल में तुम अनेक प्रकार के कष्ट सहकर दुर्बल हो गये थे, इसलिए मैंने तुम्हें युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया था।
 
Kunti said, "O mighty-armed son of Pandu! What you say is correct. O kings! In the past, you had become weak after suffering many kinds of hardships, so I encouraged you for the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)