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mahabharat 15.16.30: अपनी सास को इस प्रकार वनवास जाते देख द्रौपदी का चेहरा भी उदास हो गया। वह भी सुभद्रा के साथ रोती हुई कुंती के पीछे चलने लगी।   |   mahabharat अध्याय 15.16: धृतराष्ट्रका पुरवासियोंको लौटाना और पाण्डवोंके अनुरोध करनेपर भी कुन्तीका वनमें जानेसे न रुकना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.16.30 
द्रौपदी चान्वयाच्छ्वश्रूं विषण्णवदना तदा।
वनवासाय गच्छन्तीं रुदती भद्रया सह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
अपनी सास को इस प्रकार वनवास जाते देख द्रौपदी का चेहरा भी उदास हो गया। वह भी सुभद्रा के साथ रोती हुई कुंती के पीछे चलने लगी।
 
Seeing her mother-in-law going to exile in this manner, Draupadi's face also became sad. She too started following Kunti while crying along with Subhadra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)