Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.16.29: देवी कुन्ती ने शुद्ध हृदय से वन में रहने का निश्चय कर लिया था, इसलिए उन्होंने अपने पुत्रों की प्रार्थना नहीं सुनी, जो तरह-तरह से विलाप कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 15.16: धृतराष्ट्रका पुरवासियोंको लौटाना और पाण्डवोंके अनुरोध करनेपर भी कुन्तीका वनमें जानेसे न रुकना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवी कुन्ती ने शुद्ध हृदय से वन में रहने का निश्चय कर लिया था, इसलिए उन्होंने अपने पुत्रों की प्रार्थना नहीं सुनी, जो तरह-तरह से विलाप कर रहे थे।
Devi Kunti, having a pure heart, had already resolved to stay in the forest; therefore, she did not listen to the request of her sons, who were lamenting in various ways.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥