Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.16.16-17h: अब मैं गांधारी के साथ वन में तपस्वी की तरह रहूँगा, शरीर पर मैल और कीचड़ लगाऊँगा और अपने सास-ससुर के चरणों की सेवा में तत्पर रहूँगा॥16 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.16: धृतराष्ट्रका पुरवासियोंको लौटाना और पाण्डवोंके अनुरोध करनेपर भी कुन्तीका वनमें जानेसे न रुकना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब मैं गांधारी के साथ वन में तपस्वी की तरह रहूँगा, शरीर पर मैल और कीचड़ लगाऊँगा और अपने सास-ससुर के चरणों की सेवा में तत्पर रहूँगा॥16 1/2॥
Now I shall live in the forest with Gandhari as an ascetic, with filth and mud on my body, and shall remain devoted to the service of the feet of my mother-in-law and father-in-law.॥16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥