श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 14: राजा धृतराष्ट्रके द्वारा मृत व्यक्तियोंके लिये श्राद्ध एवं विशाल दान-यज्ञका अनुष्ठान  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  15.14.8-9 
अनिशं यत्र पुरुषा गणका लेखकास्तदा।
युधिष्ठिरस्य वचनादपृच्छन्त स्म तं नृपम्॥ ८॥
आज्ञापय किमेतेभ्य: प्रदायं दीयतामिति।
तदुपस्थितमेवात्र वचनान्ते ददुस्तदा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर की आज्ञा से हिसाब-किताब रखने वाले और लेखा-जोखा लिखने वाले बहुत से कार्यकर्ता वहाँ निरन्तर उपस्थित रहते और धृतराष्ट्र से पूछते रहते कि, "बताइए, इन भिखारियों को क्या दिया जाए? सारी सामग्री तो यहाँ उपस्थित है।" जैसे ही धृतराष्ट्र इतना धन कहते, वे कार्यकर्ता उतना धन उन भिखारियों को दे देते।
 
Many workers, who kept accounts and wrote accounts on the orders of Dharmaraja Yudhishthira, remained present there constantly and kept asking Dhritarashtra, "Tell me, what should be given to these beggars? All the material is present here. As soon as Dhritarashtra said that much money, those workers would give that much money to those beggars. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)