श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 14: राजा धृतराष्ट्रके द्वारा मृत व्यक्तियोंके लिये श्राद्ध एवं विशाल दान-यज्ञका अनुष्ठान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  15.14.7 
स श्राद्धयज्ञो ववृते बहुशो धनदक्षिण:।
अनेकधनरत्नौघो युधिष्ठिरमते तदा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर के परामर्शानुसार उस श्राद्ध यज्ञ को बहुत-से धन से सजाया गया और उसमें अनेक प्रकार की सम्पत्तियाँ तथा रत्न वितरित किए गए।
 
That Shraddha Yagna was decorated with a lot of money as per the advice of Yudhishthira. Many kinds of wealth and precious stones were distributed in it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)