भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार लगातार दस दिन दान देकर अम्बिकानन्दन राजा धृतराष्ट्र के पुत्रों और पौत्रों के ऋण से मुक्त हो गए॥18॥
Bharatshrestha! In this way, by giving donations for ten consecutive days, Ambikanandan became free from the debts of King Dhritarashtra's sons and grandsons. 18॥
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि दानयज्ञे चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें दानयज्ञविषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥