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mahabharat 15.13.14: राजा युधिष्ठिर और अर्जुन ने मुझसे बार-बार यही कहा है। अब आप मुझे बताइए कि आगे क्या करना चाहिए ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 15.13: विदुरका धृतराष्ट्रको युधिष्ठिरका उदारतापूर्ण उत्तर सुनाना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 13: विदुरका धृतराष्ट्रको युधिष्ठिरका उदारतापूर्ण उत्तर सुनाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  15.13.14 
इति मामब्रवीद् राजा पार्थश्चैव धनंजय:।
यदत्रानन्तरं कार्यं तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर और अर्जुन ने मुझसे बार-बार यही कहा है। अब आप मुझे बताइए कि आगे क्या करना चाहिए ॥14॥
 
"King Yudhishthira and Arjuna have repeatedly told me this. Now tell me what is to be done next." ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)