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mahabharat 15.13.11-12h: ‘ब्राह्मणों को निःशुल्क भूमि दान करें तथा अपने पुत्रों का श्राद्ध कर्म करें।’ युधिष्ठिर ने यह भी कहा, ‘महाराज धृतराष्ट्र मुझसे नाना प्रकार के रत्न, गौएँ, दास-दासियाँ तथा भेड़-बकरियाँ लाकर ब्राह्मणों को दान करें।   |   mahabharat अध्याय 15.13: विदुरका धृतराष्ट्रको युधिष्ठिरका उदारतापूर्ण उत्तर सुनाना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 13: विदुरका धृतराष्ट्रको युधिष्ठिरका उदारतापूर्ण उत्तर सुनाना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  15.13.11-12h 
ब्रह्मदेयाग्रहारांश्च पुत्राणामौर्ध्वदेहिकम्।
इतो रत्नानि गाश्चैव दासीदासमजाविकम्॥ ११॥
आनयित्वा कुरुश्रेष्ठो ब्राह्मणेभ्य: प्रयच्छतु।
 
 
अनुवाद
‘ब्राह्मणों को निःशुल्क भूमि दान करें तथा अपने पुत्रों का श्राद्ध कर्म करें।’ युधिष्ठिर ने यह भी कहा, ‘महाराज धृतराष्ट्र मुझसे नाना प्रकार के रत्न, गौएँ, दास-दासियाँ तथा भेड़-बकरियाँ लाकर ब्राह्मणों को दान करें।
 
‘Give free land to the Brahmins and perform the shraddha rituals for your sons.’ Yudhishthira also said, ‘Maharaja Dhritarashtra should bring from me various kinds of gems, cows, slaves, maids and sheep and goats and donate them to the Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)