vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
»
अध्याय 12: अर्जुनका भीमको समझाना और युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रको यथेष्ट धन देनेकी स्वीकृति प्रदान करना
»
श्लोक 3
श्लोक
15.12.3
इति तस्य वच: श्रुत्वा फाल्गुनस्य महात्मन:।
विदुरं प्राह धर्मात्मा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:॥ ३॥
अनुवाद
महात्मा अर्जुन के ये वचन सुनकर धर्मात्मा कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने विदुरजी से कहा- 3॥
Hearing these words of Mahatma Arjun, the virtuous Yudhishthir, son of Kunti, said to Vidurji - 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×