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mahabharat 15.11.7-8h: परन्तु महाबली भीमसेन के हृदय में उनके प्रति अमिट क्रोध था। उन्हें दुर्योधन के अत्याचारों का स्मरण था, इसलिए उन्होंने विदुरजी की बात स्वीकार नहीं की।   |   mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.11.7-8h 
न च भीमो दृढक्रोधस्तद् वचो जगृहे तदा॥ ७॥
विदुरस्य महातेजा दुर्योधनकृतं स्मरन्।
 
 
अनुवाद
परन्तु महाबली भीमसेन के हृदय में उनके प्रति अमिट क्रोध था। उन्हें दुर्योधन के अत्याचारों का स्मरण था, इसलिए उन्होंने विदुरजी की बात स्वीकार नहीं की।
 
But the mighty Bhimasena had an indelible anger against him in his heart. He remembered the atrocities committed by Duryodhan and so he did not accept Vidurji's words. 7 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)