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mahabharat 15.11.4-5: हे कुरुवंश के श्रेष्ठ! इस समय वह आपसे कुछ धन लेना चाहता है। वह युद्ध में मारे गए महाबली भीष्म, द्रोणाचार्य, सोमदत्त, महाज्ञानी बाह्लीक तथा उनके सभी पुत्रों और अन्य मित्रों का श्राद्ध करना चाहता है।   |   mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  15.11.4-5 
स त्वां कुरुकुलश्रेष्ठ किंचिदर्थमभीप्सति।
श्राद्धमिच्छति दातुं स गाङ्गेयस्य महात्मन:॥ ४॥
द्रोणस्य सोमदत्तस्य बाह्लीकस्य च धीमत:।
पुत्राणां चैव सर्वेषां ये चान्ये सुहृदो हता:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुवंश के श्रेष्ठ! इस समय वह आपसे कुछ धन लेना चाहता है। वह युद्ध में मारे गए महाबली भीष्म, द्रोणाचार्य, सोमदत्त, महाज्ञानी बाह्लीक तथा उनके सभी पुत्रों और अन्य मित्रों का श्राद्ध करना चाहता है।
 
Shreshtha of the Kuru clan! At this time he wants to take some money from you. He wishes to perform the shraddha rituals for the great Bhishma, Dronacharya, Somdatta, the wise Bahlik and all his sons and other friends who were killed in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)