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mahabharat 15.11.3: 'राजन्! महाराज धृतराष्ट्र ने वनवास की दीक्षा ले ली है। इस कार्तिकी पूर्णिमा को, जो अब निकट है, वे वन की ओर प्रस्थान करेंगे।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.11.3 
धृतराष्ट्रो महाराजो वनवासाय दीक्षित:।
गमिष्यति वनं राजन्नागतां कार्तिकीमिमाम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! महाराज धृतराष्ट्र ने वनवास की दीक्षा ले ली है। इस कार्तिकी पूर्णिमा को, जो अब निकट है, वे वन की ओर प्रस्थान करेंगे।॥3॥
 
‘King! Maharaja Dhritarashtra has taken the initiation of exile. On this Kartiki Poornima, which is now near, he will travel to the forest.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)