तमेवंवादिनं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
उवाच वचनं धीमान् जोषमास्वेति भर्त्सयन्॥ २५॥
अनुवाद
भीमसेन को इस प्रकार बोलते देख बुद्धिमान कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने उन्हें डाँटकर कहा - 'चुप रहो' ॥25॥
Seeing Bhimsen talking like this, the wise king Yudhishthir, son of Kunti, scolded him and said – 'Shut up'. 25॥
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि एकादशोऽध्याय:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥