श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  15.11.25 
तमेवंवादिनं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
उवाच वचनं धीमान् जोषमास्वेति भर्त्सयन्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन को इस प्रकार बोलते देख बुद्धिमान कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने उन्हें डाँटकर कहा - 'चुप रहो' ॥25॥
 
Seeing Bhimsen talking like this, the wise king Yudhishthir, son of Kunti, scolded him and said – 'Shut up'. 25॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि एकादशोऽध्याय:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)