Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.11.2: अपने धर्म से कभी विचलित न होने वाले राजा युधिष्ठिर के पास राजा की आज्ञा से जाकर, समस्त ज्ञानियों में श्रेष्ठ और परम तेजस्वी विदुर जी इस प्रकार बोले -॥2॥ | mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स गत्वा राजवचनादुवाचाच्युतमीश्वरम्।
युधिष्ठिरं महातेजा: सर्वबुद्धिमतां वर:॥ २॥
अनुवाद
अपने धर्म से कभी विचलित न होने वाले राजा युधिष्ठिर के पास राजा की आज्ञा से जाकर, समस्त ज्ञानियों में श्रेष्ठ और परम तेजस्वी विदुर जी इस प्रकार बोले -॥2॥
Going to King Yudhishthira, who never deviated from his Dharma, by the King's order, Vidur, the greatest of all wise men and the most illustrious, spoke thus -॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥