श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  15.11.19-20h 
कष्टात् कष्टतरं यान्तु सर्वे दुर्योधनादय:॥ १९॥
यैरियं पृथिवी कृत्स्ना घातिता कुलपांसनै:।
 
 
अनुवाद
वे दुर्योधन जैसे दुष्ट लोग, जिन्होंने इस सम्पूर्ण पृथ्वी का विनाश किया है, महान संकट में पड़ जाएँ।॥19 1/2॥
 
May those wicked people like Duryodhana, who have caused the destruction of this entire earth, be put into great trouble.'॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)