श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध  »  श्लोक 16-18h
 
 
श्लोक  15.11.16-18h 
वयं भीष्मस्य दास्याम: प्रेतकार्यं तु फाल्गुन॥ १६॥
सोमदत्तस्य नृपतेर्भूरिश्रवस एव च।
बाह्लीकस्य च राजर्षेर्द्रोणस्य च महात्मन:॥ १७॥
अन्येषां चैव सर्वेषां कुन्ती कर्णाय दास्यति।
 
 
अनुवाद
अर्जुन! भीष्म, राजा सोमदत्त, भूरिश्रवा, राजर्षि बाह्लीक, महात्मा द्रोणाचार्य तथा अन्य सभी सम्बन्धियों का श्राद्ध हम स्वयं करेंगे। हमारी माता कुन्ती कर्ण का पिण्डदान करेंगी। 16-17 1/2"
 
Arjun! We ourselves will perform Shraddha of Bhishma, King Somdutt, Bhurishrava, Rajarshi Bahlika, Mahatma Dronacharya and all other relatives. Our mother Kunti will perform Pind Daan for Karna. 16-17 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)