श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  15.11.14-15h 
राजानमुपशिक्षस्व ज्येष्ठं भ्रातरमीश्वरम्॥ १४॥
अर्हस्त्वमपि दातुं वै नादातुुं भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
‘तुम्हें अपने बड़े भाई, प्रतापी राजा युधिष्ठिर के आचरण से शिक्षा लेनी चाहिए। हे भरतश्रेष्ठ! तुम भी दूसरों को देने के ही योग्य हो, दूसरों से लेने के नहीं।’॥14 1/2॥
 
‘You should learn from the behaviour of your elder brother, the glorious King Yudhishthira. O best of the Bharatas, you too are fit only to give to others; not fit to take from others.’॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)