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mahabharat 15.10.8: उसका हृदय शून्य हो गया था। उस शून्य हृदय के साथ ही वह धृतराष्ट्र के प्रवास से उत्पन्न दुःख को सहन करके अचेत हो गया ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  15.10.8 
हृदयै: शून्यभूतैस्ते धृतराष्ट्रप्रवासजम्।
दु:खं संधारयन्तो हि नष्टसंज्ञा इवाभवन्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उसका हृदय शून्य हो गया था। उस शून्य हृदय के साथ ही वह धृतराष्ट्र के प्रवास से उत्पन्न दुःख को सहन करके अचेत हो गया ॥8॥
 
His heart had become empty. With that empty heart, he became unconscious after bearing the sorrow caused by Dhritarashtra's migration. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)