Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.10.51-52: धृतराष्ट्र ने भी साम्ब के वचनों की बार-बार प्रशंसा की और सबके द्वारा आदर पाकर उन्होंने धीरे-धीरे सबको विदा किया। उस समय सबने उनकी ओर शुभ दृष्टि से देखा। 51-52। | mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्रश्च तद्वाक्यमभिपूज्य पुन: पुन:॥ ५१॥
विसर्जयामास तदा प्रकृतीस्तु शनै: शनै:।
स तै: सम्पूजितो राजा शिवेनावेक्षितस्तथा॥ ५२॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने भी साम्ब के वचनों की बार-बार प्रशंसा की और सबके द्वारा आदर पाकर उन्होंने धीरे-धीरे सबको विदा किया। उस समय सबने उनकी ओर शुभ दृष्टि से देखा। 51-52।
Dhritarashtra also repeatedly praised the words of Samba and being respected by all, he slowly bid farewell to everyone. At that time everyone looked at him with auspicious eyes. 51-52.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥