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श्री महाभारत
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पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
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अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना
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श्लोक 46-47h
श्लोक
15.10.46-47h
न कुन्ती न च पाञ्चाली न चोलूपी न सात्वती॥ ४६॥
अस्मिन् जने करिष्यन्ति प्रतिकूलानि कर्हिचित्।
अनुवाद
‘कुन्ती, द्रौपदी, उलूपी और सुभद्रा भी प्रजा के प्रति कभी प्रतिकूल आचरण नहीं करेंगी।॥46 1/2॥
‘Kunti, Draupadi, Ulupi and Subhadra will also never behave adversely towards the subjects.॥ 46 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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