श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  15.10.45-46h 
मन्दा मृदुषु कौरव्य तीक्ष्णेष्वाशीविषोपमा:॥ ४५॥
वीर्यवन्तो महात्मान: पौराणां च हिते रता:।
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! ये पाँचों पाण्डव भाई बड़े वीर, महामनस्वी और ग्रामवासियों के कल्याण में तत्पर हैं। ये कोमल स्वभाव वाले सज्जनों के प्रति तो दया का व्यवहार करते हैं, किन्तु तीक्ष्ण स्वभाव वाले दुष्टों के लिए ये विषैले सर्पों के समान भयंकर हो जाते हैं। 45 1/2॥
 
Kurunandan! These five Pandava brothers are very brave, great-minded and engaged in the welfare of the villagers. They behave kindly towards good people with soft nature, but for wicked people with sharp nature they become as dangerous as poisonous snakes. 45 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)