Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.10.44-45h: राजर्षे! इस धर्मपुत्र युधिष्ठिर की संगति से भीमसेन और अर्जुन आदि भी इस प्रजा समुदाय को कभी अप्रसन्न नहीं करेंगे। 44 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विप्रियं च जनस्यास्य संसर्गाद् धर्मजस्य वै॥ ४४॥
न करिष्यन्ति राजर्षे तथा भीमार्जुनादय:।
अनुवाद
राजर्षे! इस धर्मपुत्र युधिष्ठिर की संगति से भीमसेन और अर्जुन आदि भी इस प्रजा समुदाय को कभी अप्रसन्न नहीं करेंगे। 44 1/2॥
Rajarshe! Due to the association of this son of Dharma, Yudhishthir, even Bhimsen and Arjun etc. will never cause any displeasure to this community of people. 44 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥