श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  15.10.39-40h 
दृष्टिप्रदानमपि ते पाण्डवान् प्रति नो वृथा॥ ३९॥
समर्थास्त्रिदिवस्यापि पालने किं पुन:क्षिते:।
 
 
अनुवाद
आप हमें पालने के लिए पाण्डवों को सौंप रहे हैं, परन्तु यह सब व्यर्थ है। ये पाण्डव तो स्वर्ग पर भी शासन करने में समर्थ हैं; फिर इस पृथ्वी का क्या प्रयोजन है?॥39 1/2॥
 
‘You are entrusting us to the Pandavas for our care, but all this is futile. These Pandavas are capable of ruling even heaven; then what is the point of this earth?॥ 39 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)