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mahabharat 15.10.35-36h: हे कौरवश्रेष्ठ! उस युद्ध में जो सहस्रों राजा मारे गए, वे उसे ईश्वर का ही कार्य मानते हैं। इस विषय में और कोई क्या कह सकता है? 35 1/2   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  15.10.35-36h 
यद् विशस्ता: कुरुश्रेष्ठ राजानश्च सहस्रश:॥ ३५॥
सर्वं दैवकृतं विद्धि कोऽत्र किं वक्तुमर्हति।
 
 
अनुवाद
हे कौरवश्रेष्ठ! उस युद्ध में जो सहस्रों राजा मारे गए, वे उसे ईश्वर का ही कार्य मानते हैं। इस विषय में और कोई क्या कह सकता है? 35 1/2
 
O best of the Kurus! The thousands of kings who were killed in that war, consider it to be the handiwork of God. What can anyone else say in this matter? 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)