Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.10.32-33h: नरेश्वर! ऐसा भयंकर नरसंहार दैवी शक्ति के बिना कभी नहीं हो सकता था। निश्चय ही युद्ध में मनुष्यों को, विशेषकर क्षत्रियों को, समयानुसार शत्रुओं का संहार करना चाहिए तथा अपने प्राणों का बलिदान करना चाहिए। 32 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  15.10.32-33h 
न च क्षयोऽयं नृपते ऋते दैवबलादभूत्।
अवश्यमेव संग्रामे क्षत्रियेण विशेषत:॥ ३२॥
कर्तव्यं निधनं काले मर्तव्यं क्षत्रबन्धुना।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! ऐसा भयंकर नरसंहार दैवी शक्ति के बिना कभी नहीं हो सकता था। निश्चय ही युद्ध में मनुष्यों को, विशेषकर क्षत्रियों को, समयानुसार शत्रुओं का संहार करना चाहिए तथा अपने प्राणों का बलिदान करना चाहिए। 32 1/2॥
 
Nareshwar! Such a terrible massacre could never have happened without divine power. Certainly, in battle, humans, especially Kshatriyas, should kill the enemies and sacrifice their lives as per the time. 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)