अक्षौहिण्यो महाराज दशाष्टौ च समागता:॥ २९॥
अष्टादशाहेन हता: कुरुभिर्योधपुङ्गवै:।
भीष्मद्रोणकृपाद्यैश्च कर्णेन च महात्मना॥ ३०॥
युयुधानेन वीरेण धृष्टद्युम्नेन चैव ह।
चतुर्भि: पाण्डुपुत्रैश्च भीमार्जुनयमैस्तथा॥ ३१॥
अनुवाद
महाराज! उस युद्ध में अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ एकत्रित हुई थीं; परंतु कौरव पक्ष के भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य आदि प्रमुख योद्धाओं तथा महारथी कर्ण तथा पाण्डव समूह के सात्यकि, धृष्टद्युम्न, भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि सभी को उसने अठारह दिन के भीतर ही मार डाला ॥29-31॥
Maharaj! Eighteen Akshauhini armies had gathered in that war; But the chief warriors of the Kaurava side, Bhishma, Drona, Kripacharya etc. and the great man Karna and the chief warriors of the Pandava group, Satyaki, Dhrishtadyumna, Bhimsen, Arjun, Nakul and Sahadev etc. killed everyone within eighteen days. 29-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥