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श्री महाभारत
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पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
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अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना
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श्लोक 28-29h
श्लोक
15.10.28-29h
दैवं तत् तु विजानीमो यन्न शक्यं प्रबाधितुम्॥ २८॥
दैवं पुरुषकारेण न शक्यमपि बाधितुम्।
अनुवाद
हमारी समझ में तो यही ईश्वर का विधान था। इसे कोई टाल नहीं सकता था। ईश्वर को प्रयत्न से नष्ट करना असम्भव है।॥28 1/2॥
‘In our understanding, this was the law of God. No one could have avoided it. It is impossible to destroy God by effort.॥ 28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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