श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  15.10.27-28h 
न तद् दुर्योधनकृतं न च तद् भवता कृतम्॥ २७॥
न कर्णसौबलाभ्यां च कुरवो यत् क्षयं गता:।
 
 
अनुवाद
कौरवों के संहार में न तो दुर्योधन का हाथ है, न तुम्हारा। कर्ण और शकुनि का भी इसमें कुछ हाथ नहीं है॥27 1/2॥
 
‘Neither Duryodhan nor you have any hand in the massacre of the Kauravas. Karna and Shakuni have also done nothing in this.॥ 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)