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mahabharat 15.10.2: उन सबके कण्ठ आँसुओं से अवरुद्ध हो गए थे, इसलिए वे कुछ भी बोलने में असमर्थ थे। उन्हें चुप देखकर महाराज धृतराष्ट्र ने फिर कहा -॥2॥   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  15.10.2 
तूष्णीम्भूतांस्ततस्तांस्तु बाष्पकण्ठान् महीपति:।
धृतराष्ट्रो महीपाल: पुनरेवाभ्यभाषत॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन सबके कण्ठ आँसुओं से अवरुद्ध हो गए थे, इसलिए वे कुछ भी बोलने में असमर्थ थे। उन्हें चुप देखकर महाराज धृतराष्ट्र ने फिर कहा -॥2॥
 
All their throats were blocked with tears; therefore they were unable to speak anything. Seeing them silent, Maharaja Dhritarashtra again said -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)