श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  15.10.1 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तास्तु ते तेन पौरजानपदा जना:।
वृद्धेन राज्ञा कौरव्य नष्टसंज्ञा इवाभवन्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं, 'हे जनमेजय! वृद्ध राजा धृतराष्ट्र के ऐसे करुण वचन सुनकर नगर और जनपद के सभी लोग शोक से अचेत हो गए।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! On hearing such pitiful words from the old king Dhritarashtra, all the people of the city and the district became unconscious with grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)