सदा हि गत्वा ते वीरा: पर्युपासन्त तं नृपम्।
पादाभिवादनं कृत्वा धर्मराजमते स्थिता:॥ ७॥
अनुवाद
वीर पाण्डव प्रतिदिन राजा धृतराष्ट्र के पास जाते, उनके चरणों में प्रणाम करते, कुछ समय उनकी सेवा में बैठते तथा सदैव धर्मराज युधिष्ठिर की आज्ञा में रहते थे।
The valiant Pandavas used to go to King Dhritarashtra every day, pay their respects at his feet and sit in his service for some time and always remained under the command of Dharmaraja Yudhishthira.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥