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mahabharat 15.1.5: कुरुश्रेष्ठ! विदुर, संजय और बुद्धिमान वेश्यापुत्र युयुत्सु- ये लोग सदैव धृतराष्ट्र की सेवा में उपस्थित रहते थे॥5॥   |   mahabharat अध्याय 15.1: भाइयोंसहित युधिष्ठिर तथा कुन्ती आदि देवियोंके द्वारा धृतराष्ट्र और गान्धारीकी सेवा   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.1.5 
धृतराष्ट्रमुपातिष्ठद् विदुर: संजयस्तथा।
वैश्यापुत्रश्च मेधावी युयुत्सु: कुरुसत्तम॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! विदुर, संजय और बुद्धिमान वेश्यापुत्र युयुत्सु- ये लोग सदैव धृतराष्ट्र की सेवा में उपस्थित रहते थे॥5॥
 
Kurushrestha! Vidur, Sanjay and the intelligent Yuyutsu, the son of a prostitute – these people were always present in the service of Dhritarashtra. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)