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mahabharat 15.1.21: पहले की भाँति उन्होंने उसे स्वादिष्ट फलों का गूदा, हल्का पेय (पनाक) और अन्य विदेशी खाद्य पदार्थ परोसे ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 15.1: भाइयोंसहित युधिष्ठिर तथा कुन्ती आदि देवियोंके द्वारा धृतराष्ट्र और गान्धारीकी सेवा   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 1: भाइयोंसहित युधिष्ठिर तथा कुन्ती आदि देवियोंके द्वारा धृतराष्ट्र और गान्धारीकी सेवा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  15.1.21 
मैरेयकाणि मांसानि पानकानि लघूनि च।
चित्रान् भक्ष्यविकारांश्च चक्रुस्तस्य यथा पुरा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पहले की भाँति उन्होंने उसे स्वादिष्ट फलों का गूदा, हल्का पेय (पनाक) और अन्य विदेशी खाद्य पदार्थ परोसे ॥21॥
 
As before, they served him with delicious fruit pulp, light drinks (panakas) and other exotic foods. ॥21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)