श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 1: भाइयोंसहित युधिष्ठिर तथा कुन्ती आदि देवियोंके द्वारा धृतराष्ट्र और गान्धारीकी सेवा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  15.1.20 
वासांसि च महार्हाणि माल्यानि विविधानि च।
उपाजह्रुर्यथान्यायं धृतराष्ट्रस्य पाण्डवा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों ने धृतराष्ट्र को बहुमूल्य वस्त्र और विविध प्रकार की मालाएं भेंट कीं।
 
The Pandavas appropriately presented precious clothes and garlands of various kinds to Dhritarashtra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)