श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 99: भूमि-दान, तिल-दान और उत्तम ब्राह्मणकी महिमा  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  14.99.d8 
सागरान् सरित: शैलान् समानि विषमाणि च।
सर्वगन्धरसांश्चैव ददाति वसुधां ददत् ॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य भूमि दान करता है, वह मानो समस्त सागर, नदियाँ, पर्वत, सम-विषम प्रदेश, समस्त सुगंध और स्वाद को दान कर देता है।
 
A man who donates land is as if giving away all the oceans, rivers, mountains, even and uneven regions, and all the fragrances and flavours.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)