श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 99: भूमि-दान, तिल-दान और उत्तम ब्राह्मणकी महिमा  »  श्लोक d21-d22
 
 
श्लोक  14.99.d21-d22 
किंकरा मृत्युदण्डाश्च कुम्भीपाकाश्च दारुणा:।
घोराश्च वारुणा: पाशा नोपसर्पन्ति भूमिदम्॥
निरया रौरवाद्याश्च तथा वैतरणी नदी।
तीव्राश्च यातना: कष्टा नोपसर्पन्ति भूमिदम्॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी भूमि का दान करता है, उस तक यमराज के दूत नहीं पहुँच पाते। मृत्यु, भयंकर कुम्भीपाक, भयंकर वरुणपाश, रौरव आदि नरक, वैतरणी नदी तथा यम की कठोर यातनाएँ भी भूमि दान करने वाले को नहीं सतातीं।
 
Yamraj's messengers are unable to reach the man who donates his role. The punishments of death, the terrible Kumbhipak, the dreadful Varunpash, Raurav etc. hell, the river Vaitarani and even the harsh tortures of Yama do not torment those who donate land.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)