vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 98: जल-दान, अन्न-दान और अतिथि-सत्कारका माहात्म्य
»
श्लोक d7
श्लोक
14.98.d7
शीतलं सलिलं ह्यत्र ह्यक्षय्यममृतोपमम्।
शीततोयप्रदातॄणां भवेन्नित्यं सुखावहम्॥
अनुवाद
इसका जल शीतल, अक्षय और अमृत के समान मधुर है तथा शीतल जल का दान करने वालों को यह सदैव सुख प्रदान करता है।
‘Its water is cool, inexhaustible and as sweet as nectar, and it always brings happiness to those who donate cool water.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas