श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  14.97.d9 
न तत्र वृक्षच्छाया वा न तटाकं सरोऽपि वा।
न वाप्यो दीर्घिका वापि न कूपो वा युधिष्ठिर॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! इस बीच रास्ते में न तो किसी वृक्ष की छाया है, न तालाब, न झील, न बावड़ी और न ही कोई कुआँ।
 
Yudhishthira! In the meantime there is no shade of a tree, no pond, no lake, no stepwell and no well on the way.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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