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mahabharat 14.97.d89: जो लोग दूसरों को नुकसान पहुंचाए बिना अपने परिवार की देखभाल करते हैं, वे सुनहरे विमानों में आराम से यात्रा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d89
 
 
श्लोक  14.97.d89 
परपीडामकृत्वैव भृत्यान् बिभ्रति ये नरा:।
तत्पथं ससुखं यान्ति विमानै: काञ्चनोज्ज्वलै:॥
 
 
अनुवाद
जो लोग दूसरों को नुकसान पहुंचाए बिना अपने परिवार की देखभाल करते हैं, वे सुनहरे विमानों में आराम से यात्रा करते हैं।
 
Those who look after their families without causing harm to others travel comfortably in golden aircrafts.
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)