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mahabharat 14.97.d66-d67: जो मनुष्य बड़े-बड़े बगीचे बनाकर उनमें वृक्षों के पौधे लगाते हैं, उन्हें शांतिपूर्वक सींचते हैं और फल-फूलों से सुशोभित करते हैं, वे दिव्य वाहनों पर सवार होकर, आभूषणों से सुसज्जित होकर, वृक्षों की अत्यंत सुंदर और शीतल छाया में निवास करते हुए, दिव्य पुरुषों द्वारा बार-बार सम्मानित होकर यमलोक को जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d66-d67
 
 
श्लोक  14.97.d66-d67 
आरामान् वृक्षषण्डांश्च रोपयन्ति च ये नरा:।
संवर्धयन्ति चाव्यग्रं फलपुष्पोपशोभितम्॥
वृक्षच्छायासु रम्यासु शीतलासु स्वलंकृता:।
यान्ति ते वाहनैर्दिव्यै: पूज्यमाना मुहुर्मुुहु:॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बड़े-बड़े बगीचे बनाकर उनमें वृक्षों के पौधे लगाते हैं, उन्हें शांतिपूर्वक सींचते हैं और फल-फूलों से सुशोभित करते हैं, वे दिव्य वाहनों पर सवार होकर, आभूषणों से सुसज्जित होकर, वृक्षों की अत्यंत सुंदर और शीतल छाया में निवास करते हुए, दिव्य पुरुषों द्वारा बार-बार सम्मानित होकर यमलोक को जाते हैं।
 
Those who construct large gardens and plant saplings of trees in them and peacefully water them and beautify them with fruits and flowers, they go to Yamaloka, riding on divine vehicles, adorned with ornaments, living under the very beautiful and cool shade of the trees, being repeatedly honored by the divine men.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)