श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  14.97.d6 
किं रूपं किं प्रमाणं वा वर्ण: को वास्य केशव।
जीवस्य गच्छतो नित्यं यमलोकं वदस्व मे॥
 
 
अनुवाद
केशव! यमलोक में जाने पर आत्मा का रूप और रंग कैसा होता है? और उसका शरीर कितना बड़ा होता है? कृपया मुझे ये सब बताइए।
 
Keshav! What is the appearance and colour of the soul when it goes to Yamaloka? And how big is its body? Please tell me all these things.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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