Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.97.d58-d59: राजन! जो मनुष्य शान्त मन से श्रोत्रिय ब्राह्मण को तिल, तिलकी गौ या घृतकी गौ दान करते हैं, वे सूर्य के समान उज्ज्वल और निर्मल विमानों में बैठकर गन्धर्वों का गान सुनते हुए यमराज के नगर को जाते हैं। | mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये तिलं तिलधेनुं वा घृतधेनुमथापि वा।
श्रोत्रियेभ्य: प्रयच्छन्ति सौम्यभावसमन्विता:॥
सूर्यमण्डलसंकाशैर्यानैस्ते यान्ति निर्मलै:।
गीयमानैस्तु गन्धर्वैर्वैवस्वतपुरं नृप॥
अनुवाद
राजन! जो मनुष्य शान्त मन से श्रोत्रिय ब्राह्मण को तिल, तिलकी गौ या घृतकी गौ दान करते हैं, वे सूर्य के समान उज्ज्वल और निर्मल विमानों में बैठकर गन्धर्वों का गान सुनते हुए यमराज के नगर को जाते हैं।
Rajan! Those who, with a peaceful mind, donate sesame seeds or Tilki cow or Ghritki cow to the Shrotriya Brahmin, they go to the city of Yamraj, listening to the songs of Gandharvas, in planes as bright and clear as the sun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥