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पानीयं ये प्रयच्छन्ति सर्वभूतप्रजीवनम्।
ते सुतृप्ता: सुखं यान्ति भवनैर्हंसचोदितै:॥
अनुवाद
जो मनुष्य समस्त प्राणियों को जीवन देने वाले जल का दान करते हैं, वे अत्यन्त संतुष्ट होकर हंसों द्वारा खींचे जाने वाले विमानों पर बैठकर सुखपूर्वक धर्मराज के नगर को जाते हैं।
Those who donate water, which gives life to all creatures, being extremely satisfied, go to the city of Dharmaraja comfortably in planes drawn by swans.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥