Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.97.d56: जो लोग ब्राह्मणों को घी में बने हुए नाना प्रकार के व्यंजन अर्पित करते हैं, वे वायु के समान वेगवान और नाना प्रकार के प्राणियों से भरे हुए श्वेत विमानों पर बैठकर यमलोक की यात्रा करते हैं। | mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये प्रयच्छन्ति विप्रेभ्यो विचित्रान्नं घृताप्लुतम्।
ते व्रजन्त्यमलाभ्राभैर्विमानैर्वायुवेगिभि:।
पुरं तत् प्रेतनाथस्य नानाजनसमाकुलम्॥
अनुवाद
जो लोग ब्राह्मणों को घी में बने हुए नाना प्रकार के व्यंजन अर्पित करते हैं, वे वायु के समान वेगवान और नाना प्रकार के प्राणियों से भरे हुए श्वेत विमानों पर बैठकर यमलोक की यात्रा करते हैं।
Those who offer various kinds of dishes prepared in ghee to the Brahmins, travel to Yamlok, sitting on white planes that are as fast as the wind, filled with various creatures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥