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mahabharat 14.97.d50: जो लोग प्रतिदिन सच्चे मन से सत्य बोलते हैं, वे बैलों द्वारा खींचे जाने वाले विमानों में बैठकर यमलोक जाते हैं, जो स्वच्छ बादलों के समान दिखते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d50
 
 
श्लोक  14.97.d50 
ये च नित्यं प्रभाषन्ते सत्यं निष्कल्मषं वच:।
ते च यान्त्यमलाभ्राभैर्विमानैर्वृषयोजितै:॥
 
 
अनुवाद
जो लोग प्रतिदिन सच्चे मन से सत्य बोलते हैं, वे बैलों द्वारा खींचे जाने वाले विमानों में बैठकर यमलोक जाते हैं, जो स्वच्छ बादलों के समान दिखते हैं।
 
Those who speak the truth every day with sincere intentions go to Yamaloka in planes drawn by bulls, which look like clear clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)