Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.97.d37-d38: जो दुष्ट बुद्धि वाले और पापी मनुष्य बलपूर्वक दूसरों की गाय, अन्न, सोना, खेत और घर आदि हड़प लेते हैं, वे यमलोक जाते समय यम के दूतों द्वारा पत्थरों, जलती हुई लकड़ी, लकड़ियों, लकड़ी और बेंत की छड़ों से पीटे जाते हैं और उनके शरीर के सभी अंगों पर घाव हो जाते हैं। | mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गाश्च धान्यं हिरण्यं वा बलात् क्षेत्रं गृहं तथा।
ये हरन्ति दुरात्मान: परस्वं पापकारिण:॥
पाषाणैरुल्मुकैर्दण्डै: काष्ठघातैश्च झर्झरै:।
हन्यमानै: क्षताकीर्णैर्गन्तव्यं तैर्यमालयम्॥
अनुवाद
जो दुष्ट बुद्धि वाले और पापी मनुष्य बलपूर्वक दूसरों की गाय, अन्न, सोना, खेत और घर आदि हड़प लेते हैं, वे यमलोक जाते समय यम के दूतों द्वारा पत्थरों, जलती हुई लकड़ी, लकड़ियों, लकड़ी और बेंत की छड़ों से पीटे जाते हैं और उनके शरीर के सभी अंगों पर घाव हो जाते हैं।
Those evil-minded and sinful men who by force usurp others' cows, grains, gold, fields and houses, etc., while going to Yamaloka, are beaten with stones, burning wood, sticks, wooden sticks and cane rods by the messengers of Yama and suffer wounds on all their body parts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥